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Friday, February 28, 2014

Pawan Mall - Shayari 3

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"शुरुवात" तो करना चाहा,
मगर अंत ना मिला...

"किस्मत" से लड़ना चाहा,
मगर वक़्त ना मिला...

"उड़ना" तो खूब चाहा,
मगर पंख ना मिला...

यूँ ही नहीं कहते लोग,
"दुनिया बहुत जालिम हैं"

"रोना" तो खूब चाहा,
मगर कोई संग ना मिला...


via : पवन
http://blog.pawanmall.net
Pawan Mall - 2 Shayari

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आंधियां ग़म की चलेंगी तो संवर जाऊंगा,
मैं तेरी जुल्फ नहीं हूँ जो बिखर जाऊंगा,

तुझसे बिछडा तो मत पूछो किधर जाऊंगा,
मैं तो दरिया हूँ समंदर में उतर जाऊंगा,

नाखुदा मुझसे न होगी ये खुशामद तेरी,
मैं वो खुद्दार हूँ कश्ती से उतर जाऊंगा,

मुझको शूली पे चढाने की ज़रुरत क्या है,
मेरे हांथों से कलम छीन लो मर जाऊंगा,

मुझको दुनिया से 'ज़फर' कौन मिटा सकता है,
मैं तो शायर हूँ किताबों में बिखर जाऊंगा....

-------------------------------------- बहादुर शाह ज़फर